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खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के तत्वावधान में डब्लूडीआरए ने ‘वेयरहाउसिंग पंजीकरण का महत्व और एफपीओ/पीएसीसी को ई-एनडब्ल्यूआर के लाभ’ विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया।

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वेबिनार में 120 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया

एफपीओ/पीएसीएस/एसएचजी के लिए डब्ल्यूडीआरए के साथ पंजीकरण शुल्क काफी हद तक कम होकर 500 रुपये हो गया है, जबकि अन्य पारंपरिक भंडारगृहों के लिए यह 5000 रुपये से 30,000 रुपये तक था

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ का प्रतिष्ठित सप्ताह मना रहा है। उत्सव के एक भाग के रूप में किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) / प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पीएसीएस), नाबार्ड व एसएफएसी के प्रतिनिधियों के साथ भंडारण विकास और विनियामक प्राधिकरण (डब्ल्यूडीआरए) द्वारा आज एक वेबिनार का आयोजन किया गया।

इस वेबिनार में विभिन्न राज्यों के 120 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

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अध्यक्ष श्री हरप्रीत सिंह ने विभिन्न राज्यों के पीएसीएस/एफपीओ के प्रतिभागियों को संबोधित करने के साथ ही इस वेबिनार का उद्घाटन किया। उन्होंने खेतों के पास ही वेयरहाउसिंग सुविधाएं प्रदान करने में पीएसीएस/एफपीओ के महत्व और प्राकृतिक लाभ पर जोर दिया। श्री हरप्रीत सिंह ने पीएसीएस/एफपीओ के लिए एक व्यापार मॉडल का सुझाव दिया, जिसमें संग्रह, पृथक्करण / श्रेणीकरण और वित्तीय संस्थानों के माध्यम से सर्शत वित्त प्रदान करने में सहायता एवं सर्वोत्तम प्रक्रिया से कार्य करने के लिए सामूहिक लॉट के रूप में उचित समय पर बिक्री की समग्र सेवाएं प्रदान की जाती हैं और इस तरह से किसानों की आय में वृद्धि होती है। पीएसीएस/एफपीओ अपने इलाके में अप्रयुक्त गोदामों को किराए पर ले सकते हैं, यदि उनके पास गोदाम नहीं हैं तथा किसानों को लाभ देने के लिए वे उन्हें डब्लूडीआरए मानकों में अपग्रेड कर सकते हैं।

डब्लूडीआरए ने पीएसीएस/एफपीओ को डब्ल्यूडीआरए के साथ पंजीकरण की प्रक्रिया, रियायतों और इलेक्ट्रॉनिक विक्रेय वेयरहाउस रसीद (ई-एनडब्ल्यूआर) तथा प्रदान किये जाने वाले लाभों पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी। यह सूचित किया जाता है कि एफपीओ/पीएसीएस/एसएचजी के लिए पंजीकरण शुल्क काफी हद तक कम करके 500 रुपये कर दिया गया है, जबकि अन्य पारंपरिक भंडारगृहों के लिए यह 5,000 रुपये से 30,000 रुपये तक होने की तुलना में अन्य शुल्कों में कमी की गई है।

भंडारगृह क्षेत्र के विकास और ई-एनडब्ल्यूआर के लाभों पर एक लघु फिल्म का शुभारंभ किया गया। मैसर्स एनईआरएल द्वारा रिपोजिटरी इको-सिस्टम के संबंध में एक प्रस्तुतिकरण दिया गया। नाबार्ड के श्री जैनेंद्र अलोरिया ने पीएसीएस और एफपीओ को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं पर एक व्यापक प्रस्तुति दी। उन्होंने नाबार्ड द्वारा भंडारगृहों के निर्माण के लिए प्रदान की जाने वाली विभिन्न सब्सिडी और सहायता के बारे में जानकारी दी। एसएफएसी के श्री विशाल ने ई-एनएएम इको-सिस्टम के बारे में बताया और ई-एनएएम तथा ई-एनडब्ल्यूआर एकीकरण के माध्यम से कृषि विपणन के लाभों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विनियमित वेयरहाउसिंग के लाभों को दोहराया और ई-एनएएम के लिए एसएफएसी द्वारा लॉन्च किए गए मोबाइल ऐप में उपलब्ध एसएमएस, ट्रैकिंग तथा मौसम पूर्वानुमान जैसे लाभों का वर्णन किया।