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वीरेंद्र सचदेवा ने कहा- भ्रष्ट केजरीवाल सरकार की शराब नीति के चलते 2,002.68 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ

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नई दिल्ली
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने मंगलवार को मीडिया को संबोधित करते हुए दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी (आप) पर शराब घोटाले में संलिप्तता का आरोप लगाया। सचदेवा ने कहा कि दिल्ली विधानसभा में प्रस्तुत सीएजी रिपोर्ट से स्पष्ट है कि भ्रष्ट केजरीवाल सरकार की शराब नीति के चलते 2,002.68 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ।

सचदेवा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल की सरकार ने इस रिपोर्ट को टेबल करने से बार-बार बचने की कोशिश की। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शराब घोटाले की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया है और अब सब कुछ सामने आ रहा है। ये भ्रष्टाचारियों के कार्य हैं, जिनका पर्दाफाश हो चुका है।

उन्होंने कहा कि वह पहले से ही आरोप लगाते रहे हैं कि अगर दिल्ली में कोई शराब का दलाल है तो वह अरविंद केजरीवाल हैं। इस रिपोर्ट में साफ तौर पर यह साबित हो रहा है कि कैसे दिल्ली सरकार को 2002.68 करोड़ रुपये का रेवेन्यू लॉस हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि रेवेन्यू लॉस तो एक हिस्सा है, असल में भ्रष्टाचार और लूट तो और भी ज्यादा है, जो इन लोगों ने की है।

सचदेवा ने आगे कहा कि रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि शराब की दुकानों के लिए गलत नियम बनाए गए थे और पूरे क्षेत्र में कानून का उल्लंघन किया गया। दिल्ली विधानसभा में प्रस्तुत सीएजी रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया कि दिल्ली की आप-दा सरकार की 'शराब नीति' अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की महाभ्रष्ट जुगलबंदी का परिणाम थी। इन्होंने एकाधिकार को बढ़ावा दिया, कुछ ही कंपनियों को शराब आपूर्ति का पूरा नियंत्रण मिला। इंडोस्पिरिट, महादेव लिकर और ब्रिंडको ने 71 फीसदी सप्लाई पर कब्जा जमाया।

उन्होंने आगे कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार में कैबिनेट प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया। बिना कैबिनेट और एलजी की मंजूरी के शराब नीति में बड़े बदलाव किए गए। शराब की अवैध दुकानें खोली गईं, रिहायशी इलाकों में एमसीडी-डीडीए की ब‍िना मंजूरी के ठेके खोल दिए गए, एमसीडी ने 4 अवैध दुकानें सील कीं।

सचदेवा ने कहा कि कोरोना महामारी की आड़ में शराब व्यापारियों को छूट दी गई, जिसका परिणाम यह हुआ कि सरकार को 144 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। यह पैसा सीधे तौर पर मनीष सिसोदिया, अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की जेब में जा रहा था। सरकारी विभागों में जमा किए गए डिपॉजिट का लाभ इन नेताओं ने उठाया, इससे सरकार को 27 करोड़ रुपये का और नुकसान हुआ।