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उपराष्ट्रपति ने देश की शांति और अखंडता के लिए खतरा उत्‍पन्‍न करने वाली ताकतों के प्रति आगाह किया

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किसी धर्म या संस्कृति को नीचा दिखाना भारतीय संस्कृति नहीं है : उपराष्ट्रपति

भारत को कमजोर करने के प्रयासों को विफल करना और राष्ट्र के हितों की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है: उपराष्ट्रपति

भारत का संसदीय लोकतंत्र और बहुलवादी मूल्य दुनिया के लिए एक मॉडल है: उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति ने स्वतंत्रता सेनानी और पत्रकार श्री दामाराजू पुंडरीकाक्षुदु पर पुस्तक का विमोचन किया

उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने आज उन ताकतों और निहित स्वार्थों के प्रति आगाह किया जो एक विभाजनकारी एजेंडे के माध्यम से देश की शांति और अखंडता के लिए खतरा हैं। इस बात पर जोर देते हुए कि ‘किसी संस्कृति, धर्म या भाषा को नीचा दिखाना भारतीय संस्कृति नहीं है’, उन्होंने प्रत्येक नागरिक से भारत को कमजोर करने के प्रयासों को विफल करने और एकजुट होने और राष्ट्र के हितों की रक्षा करने की जिम्मेदारी लेने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने इस बात को रेखांकित किया कि भारत के सभ्यतागत मूल्य सभी संस्कृतियों के प्रति सम्मान और सहिष्णुता सिखाते हैं और छिटपुट घटनाएं भारत के धर्मनिरपेक्ष लोकाचार को कमजोर नहीं कर सकती हैं। अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि खराब करने के प्रयासों की निंदा करते हुए श्री नायडु ने दोहराया कि भारत का संसदीय लोकतंत्र और बहुलवादी मूल्य दुनिया के लिए अनुकरणीय मॉडल हैं।

स्वतंत्रता सेनानी और पत्रकार श्री दामाराजू पुंडरीकाक्षुडु की जीवन यात्रा पर आज विजयवाड़ा में एक पुस्तक का विमोचन करते हुए श्री नायडु ने कहा कि ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ हमें स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हमारे नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों के अनेक बलिदानों को याद करने का अवसर देता है। श्री नायडु ने पुस्तक के शोध और संकलन में लेखक श्री येल्लाप्रगदा मल्लिकार्जुन राव के प्रयासों की सराहना की।

गीत और नाटक के माध्यम से गांधीजी के योगदान को लोकप्रिय बनाने में श्री दामाराजू के अतिशय प्रयासों की चर्चा करते हुए, श्री नायडु ने मीडिया हाउस से विशेष कार्यक्रमों और लेखों की श्रृंखला के माध्यम से भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों के प्रयासों को उजागर करने का आह्वान किया ताकि युवा पीढ़ी को हमारे नेताओं के जीवन की शिक्षाओं से अवगत कराया जा सके।

उपराष्ट्रपति ने युवाओं से गरीबी, निरक्षरता, सामाजिक भेदभाव और महिलाओं के खिलाफ अत्याचार से मुक्त भारत के निर्माण की दिशा में प्रयास करने का भी आह्वान किया, क्योंकि यह हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने याद दिलाया कि समाज में ‘विभाजन’ – शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच, सामाजिक वर्गों के बीच और लिंगों के बीच – अंततः देश को कमजोर करता है।

श्री नायडु ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्षेत्र के नेताओं के विभिन्न प्रयासों को याद करते हुए हाल ही में आंध्र प्रदेश के भीमावरम में महान स्वतंत्रता सेनानी श्री अल्लूरी सीताराम राजू की प्रतिमा का अनावरण करने में प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की सराहना की।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने स्वर्ण भारत ट्रस्ट, विजयवाड़ा में विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रमों के प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र भी वितरित किए। उन्होंने उनके चयनित विषय में कड़ी मेहनत करने और सफलता प्राप्त करने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया। आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री श्री कामिनेनी श्रीनिवास, पुस्तक के लेखक श्री येल्लाप्रगदा मल्लिकार्जुन राव, स्वर्ण भारत ट्रस्ट के प्रबंधन, अन्य गणमान्य व्यक्तियों और छात्रों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।