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उत्तरकाशी टनल हादसा अपडेट: पीएम मोदी ने सीएम धामी को किया फोन, 9वें दिन भी राहत और बचाव कार्य जारी

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देहरादून, 20नवंबर। उत्तरकाशी टनल में फंसे 41 मजदूरों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन सोमवार को 9वें दिन भी जारी है. सुरंग में फंसे मजदूरों तक खाना और पानी पहुंचाने के लिए 4 इंच की पाइपलाइन की जगह करीब 40 मीटर तक 6 इंच की पाइपलाइन बिछाई गई है. इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बात की है. पीएम मोदी ने धामी से सिल्क्यारा के पास टनल में फंसे श्रमिकों को सुरक्षित निकालने के लिए जारी राहत और बचाव कार्यों के बारे में जानकारी ली. प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा आवश्यक बचाव उपकरण व संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं. केंद्र और राज्य की एजेंसियों के परस्पर समन्वय से श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा. फंसे श्रमिकों का मनोबल बनाए रखने की जरूरत है.
मुख्यमंत्री ने पीएम को बताया कि राज्य और केंद्रीय एजेंसियां परस्पर समन्वय और तत्परता के साथ राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं. टनल में फंसे श्रमिक सुरक्षित हैं और ऑक्सीजन, पौष्टिक भोजन और पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है. राहत और बचाव कार्यों के लिए एक्सपर्ट्स की राय लेकर एजेंसियां काम कर रही हैं.

इंटरनेशनल टनलिंग अंडरग्राउंड स्पेस के अध्यक्ष प्रोफेसर अर्नोल्ड डिक्स ने बताया कल से बहुत सारा काम किया जा चुका है.यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम न केवल उन्हें(श्रमिकों) बचाएं बल्कि यह भी जरूरी है कि हम जिन श्रमिकों को बचा रहे हैं वह सुरक्षित रहे. वहीं, दुर्घटनाग्रस्त सुरंग के मुख्य द्वार पर बने एक मंदिर में प्रार्थना की गई, जहां फंसे हुए पीड़ितों को बाहर निकालने के लिए बचाव अभियान चल रहा है.

सरकार ने रविवार को कहा कि उत्तरकाशी में सिल्कयारा सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों की जान बचाने के लिए गहरी ड्रिलिंग में विशेषज्ञता रखने वाली ओएनजीसी ने बरकोट छोर से वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए शुरुआती कार्य शुरू कर दिया है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव अनुराग जैन ने कहा कि फंसे हुए 41 श्रमिकों को बचाने के लिए पांच-विकल्प कार्य योजना लागू करने का निर्णय लिया गया है.

उन्होंने कहा कि घटना के बाद उत्तराखंड सरकार और केंद्र ने फंसे हुए 41 मजदूरों को बचाने के लिए संसाधन जुटाए. गंदगी के बीच 900 मिमी का पाइप बिछाने का निर्णय लिया गया, क्योंकि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार यह सबसे अच्छा और सबसे तेज़ संभव समाधान था.