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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह आज संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित ‘अबू धाबी अंतरिक्ष बहस’ में आधिकारिक भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे

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नई दिल्ली, 5दिसंबर।केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह आज संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में आयोजित” अबू धाबी अंतरिक्ष बहस” में आधिकारिक भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगेI
डॉ. जितेंद्र सिंह इजराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग के साथ भारत की ओर से इस बहस के उद्घाटन समारोह को संबोधित करेंगे।

डॉ. जितेंद्र सिंह यूएई के विदेश राज्य मंत्री, बहरीन के विदेश मंत्री और इस्राइल के उन्नत प्रौद्योगिकी मंत्री के साथ ‘अंतरिक्ष कूटनीति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को सक्षम करने में विदेश नीति की भूमिका’ पर मंत्रिस्तरीय बैठक में भी भाग लेंगे।

मंत्री महोदय का द्विपक्षीय अंतरिक्ष सहयोग को और मजबूत करने के उपायों एवं साधनों पर चर्चा करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात की उन्नत प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री और यूएई अंतरिक्ष एजेंसी की अध्यक्ष सारा अल अमीरी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता आयोजित करने का भी कार्यक्रम है।

अबू धाबी रवाना होने से पहले जारी एक वक्तव्य में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात संयुक्त अंतरिक्ष सहयोग अरब प्रायद्वीप में एक बड़ी छलांग लगाने की कगार पर है, क्योंकि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय अंतरिक्ष सहयोग में वृद्धि को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और यूएई अंतरिक्ष एजेंसी (यूएईएसए) ने वर्ष 2016 में शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बाहरी अंतरिक्ष की खोज और उपयोग में सहयोग के संबंध में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। उन्‍होंने यह भी बताया कि संयुक्त अरब अमीरात का पहला नैनोसेटेलाइट- ‘नायिफ-1’ पर्यावरणीय अंतरिक्ष डेटा एकत्र करने के लिए श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी द्वारा प्रक्षेपित किया गया था।

संयुक्त अरब अमीरात इस क्षेत्र में एक उभरती हुई अंतरिक्ष शक्ति है और उसने अपनी अंतरिक्ष यात्रा के पिछले 25 वर्षों में तेजी से प्रगति की है। जुलाई 2020 में, यूएई ने होप प्रोब नाम से अपना मंगल मिशन अन्तरिक्ष में भेजा, जिसने फरवरी 2021 में मंगल की कक्षा में प्रवेश किया। उसने यूएई को यह उपलब्धि हासिल करने वाला पहला अरब देश और विश्व का छठा देश बना दिया। यूएई शीघ्र ही रशीद रोवर या अमीरात लूनर मिशन लॉन्च करने की योजना बना रहा है। सितंबर 2019 में, हंजला अल मंसूरी अंतरिक्ष में जाने वाले पहले अमीराती बने, जब वह कजाकिस्तान से एक रूसी अंतरिक्ष यान के माध्यम से आठ दिनों के लिए अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) गए थे। इस वर्ष, संयुक्त अरब अमीरात के एक और अंतरिक्ष यात्री को छह महीने की अवधि के लिए नासा के क्रू रोटेशन फ्लाइट, स्पेसएक्स क्रू-6 पर आईएसएस की यात्रा के लिए चुना गया था।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के अंतरिक्ष सुधारों ने कई नए रास्ते खोले हैं और पिछले महीने ही भारत ने भारत के पहले निजी रॉकेट को लॉन्च करके भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक नई शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों ने तीन-चार साल पहले कुछ अंतरिक्ष स्टार्ट-अप्स ने बहुत कम समय के भीतर स्टार्ट-अप की अभिनव क्षमता को उजागर किया है और आज हमारे पास अंतरिक्ष मलबा प्रबंधन, नैनो-उपग्रह, प्रक्षेपण यान, ग्राउंड सिस्टम, अनुसंधान जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में काम करने वाले 105 स्टार्ट-अप्स हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने याद दिलाया कि गतवर्ष 11 अक्टूबर, 2021 को अंतरिक्ष और उपग्रह कंपनियों के एक प्रमुख उद्योग संघ इंडियन स्पेस एसोसिएशन (आईएसपीए) को शुरू करते हुए, मोदी जी ने कहा था, “ अंतरिक्ष सुधारों के लिए हमारा दृष्टिकोण चार स्तंभों पर आधारित है- नवोन्मेष में निजी क्षेत्र को स्वतंत्रता, एक सक्षमकर्ता के रूप में सरकार की भूमिका, युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करना और अंतरिक्ष क्षेत्र को आम आदमी की प्रगति के संसाधन के रूप में देखना”।

डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा संयुक्त अरब अमीरात की उन्नत प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री और संयुक्त अरब अमीरात अंतरिक्ष एजेंसी की अध्यक्ष सारा अल अमीरी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच उन्नत और उभरती अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के बीच संयुक्त स्टार्ट-अप उपक्रमों के लिए बातचीत किए जाने की भी संभावना है। अंतरिक्ष क्षेत्र में दोनों देशों की अपार संभावनाओं को देखते हुए इस क्षेत्र में सहयोग द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का एक नया आयाम होगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद के नेतृत्व में, सदियों पुराने घनिष्ठ द्विपक्षीय संबंधों ने तीव्र गति प्राप्त की है क्योंकि यह संबंध 2017 में व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ गया था। दोनों देशों ने इस साल की शुरुआत में व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और अब दोनों देश अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान 72 अरब (बिलियन) अमेरिकी डॉलर से 100 अरब (बिलियन) अमेरिकी डॉलर तक ले जाने की इच्छा रखते हैं।