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केंद्रीय राज्य मंत्री प्रतिमा भौमिक और डॉ. वीरेंद्र कुमार की उपस्थिति में दिव्यांग लाभार्थियों को प्रदान किया गया यूडीआईडी कार्ड

केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री ने स्वदेशी आईक्यू मूल्यांकन परीक्षण किट भी राष्ट्र को समर्पित की

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नई दिल्ली, 11दिसंबर। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार और केंद्रीय राज्य मंत्री (दिव्यांगजन) कुमारी प्रतिमा भौमिक उपस्थित ने समावेशिता और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण छलांग को उजागर करने वाले एक महत्वपूर्ण अवसर पर आज वंशिका नंद किशोर माने और अन्य सात दिव्यांग लाभार्थियों को एक करोड़वां विशिष्ट विकलांगता पहचान (यूडीआईडी) कार्ड प्रदान किया।

बता दें कि भारत सरकार ने 2017 में यूडीआईडी परियोजना लॉन्च की थी जिसका उद्देश्य देश में प्रत्येक दिव्यांगजन को एक विशिष्ट पहचान प्रदान करना है। जिससे रणनीतिक कल्याण योजना के लिए एक व्यापक डेटाबेस तैयार किया जा सके।

कार्यक्रम में केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री ने आत्मनिर्भरता में एक मील का पत्थर प्रदर्शित करते हुए एक स्वदेशी आईक्यू मूल्यांकन परीक्षण किट राष्ट्र को समर्पित किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने देश के लिए एक मूल्यवान संसाधन के रूप में दिव्यांगजनों के महत्व पर बल दिया और एक समावेशी समाज और दिव्यांगजनों के समग्र विकास के लिए सरकार के विजन के बारें में बताया। उन्होंने आईक्यू टेस्ट के भारतीय संस्करण के विकास पर गर्व व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के विजन को दोहराया।

राज्य मंत्री (दिव्यांगजन) कुमारी प्रतिमा भौमिक ने कहा कि सरकार द्वारा विकसित उपकरणों से उत्तर पूर्व के दूरगामी क्षेत्रों और यहां तक कि अन्य देशों को भी लाभ होना चाहिए। उन्होंने परीक्षण किट के स्वदेशीकरण पर संतोष व्यक्त किया और बौद्धिक दिव्यांगता के क्षेत्र में नए अनुसंधान का मार्ग प्रशस्त करने तथा भारतीय नागरिकों को सबसे कम लागत पर उपकरण तक पहुंच प्रदान करने की इसकी क्षमता पर बल दिया।

आयोजन के दौरान यह पता लगा कि यूडीआईडी कार्ड को विभिन्न योजनाओं से जोड़ा गया है, जिसमें कौशल प्रशिक्षण, छात्रवृत्ति आवेदन सत्यापन, राष्ट्रीय ट्रस्ट बीमा योजनाएं (निरामय), डीडीआरएस लाभार्थी, आरसीआई विनियमित संस्थान, निशुल्क क्लिनिकल ​​सेवाएं और राष्ट्रीय संस्थानों और सी.आर.सी.में शिक्षा शामिल हैं।

दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने दिव्यांगजनों (पीडब्ल्यूडी) के माता-पिता और भाई-बहनों के लिए पाठ्यक्रम विकसित करने, उन्हें दिव्यांग बच्चों के कल्याण में महत्वपूर्ण हितधारकों के रूप में मान्यता देने के लिए विभाग की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

गौरतलब है कि देश में प्रतिदिन लगभग 1.5 लाख यूडीआईडी कार्ड बनाए जा रहे हैं। उपयोगकर्ताओं के लिए आसानी हो इसलिए आवेदन प्रक्रिया कोभी बहुत ही सरल बनाई गया है साथ ही आधार लिंकेज को भी अनिवार्य किया गया है।