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छत्तीसगढ़-कोरिया में नदी किनारे चार दिन से मृत पड़ा बाघ

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कोरिया.

गुरुघासीदास राष्ट्रीय उद्यान व कोरिया वनमण्डल की सीमा पर मृत मिले बाघ के शव का शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद वन विभाग ने अंतिम संस्कार किया गया। ग्रामीणों से बातचीत के दौरान यह बात भी सामने आई कि 5 नवम्बर से ही बाघ नदी किनारे मृत पड़ा था, लेकिन देखने से ऐसा लग रहा था कि बाघ सोया हुआ है।

बाघ के मृत मिलने की सूचना मिलने पर वन अमला मौके पर पहुँचा और बाघ की सुरक्षा करते हुए आसपास के इलाके की सर्चिंग की । डॉग स्क्वायड को भी बुलाया गया लेकिन कुछ निकलकर नहीं आ सका। शनिवार को चार सदस्यीय चिकित्सकों का दल यहां पहुँचा जिसने पोस्टमार्टम किया। पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का पता चल सकेगा। कोरिया वनमण्डल और गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान की सीमा क्षेत्र में कुदरी और कटवार के जंगल में एक दिन पहले शुक्रवार को  बाघ मृत अवस्था में मिला था। नदी के समीप खनखोपर नाले में बाघ को देखा गया जिसके बाद हड़कंप मच गया। वन अमला मौके पर पहुँचा , अम्बिकापुर से खुद मुख्य वन संरक्षक  व्ही मातेश्वरन भी रात में मौके पर पहुँचे इलाके की सर्चिंग की गई लेकिन कुछ हाथ नही लगा । रात भर बाघ की निगरानी करने के बाद शनिवार की दोपहर पीएम कर उसका अंतिम संस्कार किया गया। जानकारी मिली कि बाघ के शरीर के सभी अंग मौजूद थे और वह पूरी तरह वयस्क था । मौके पर  वन अमले के अलावा वाइल्ड लाइफ  डॉग स्क्वायड टीम पशु चिकित्सक और बड़ी संख्या में ग्रामीण जन मौजूद थे । ग्रामीणों ने बताया कि उनके इलाके में बाघ का मूवमेंट पहले नही रहा है । गुरुघासीदास राष्ट्रीय उद्यान को टाइगर रिजर्व  बनाये जाने की मंजूरी मिल चुकी है ऐसे में बाघ की मौत को लेकर सवाल भी खड़े हो रहे है । इसके पहले भी इस क्षेत्र में एक बाघ और बाघिन की मौत हो चुकी है ऐसे में वन विभाग को कड़े कदम उठाने की जरूरत है।