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ग्वालियर में भू-माफियाओं की नापाक साजिश नाकाम, कलेक्टर के फर्जी सील और स्टांप से होने वाला था बड़ा खेल

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ग्वालियर
 जिले के जिरेना गांव में 20 बीघा सरकारी जमीन को हड़पने की कोशिश में जालसाजों ने कलेक्टर का फर्जी आदेश बना दिया, लेकिन उनका फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। इसमें हस्ताक्षर और आदेश की भाषा में अंतर पाया गया। मामले की शिकायत पर तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

ऐसे पकड़ी गई करतूत

गांव में 20 बीघा सरकारी जमीन को हड़पने के लिए जालसाजों ने कलेक्टर का फर्जी आदेश ही बना दिया। लेकिन उनका फर्जीवाड़ा नाकाम रहा। आदेश में लिखी इबारत और हस्ताक्षर के अंतर से जालसाजों की करतूत पकड़ी गई। जिसकी शिकायत कर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। वही पुलिस ने तीन लोगों पर मामला दर्ज किया है।
कोर्ट में चल रहा था मुकदमा

दरअसल ग्वालियर के देहात जिरेना गांव में सर्वे क्रमांक 528, 529 और 111 में 20 बीघा सरकारी जमीन को लेकर दो पक्षों में विवाद कलेक्टर न्यायालय में पहुंचा था। इसमें प्रताप सिंह, गब्बर सिंह माहौर ने कुछ लोगों से सांठगांठ कर कलेक्टर के हस्ताक्षर का कूट रचित आदेश बनाकर पेश कर दिया। इसमें बताया गया था कि प्रकरण प्रताप सिंह और गब्बर सिंह के नाम दर्ज है। जबकि प्रकरण आधुनिक डलवपर्स भागीदार फर्म जय राजेन्द्र सेठ के नाम अंकित है। इसके अलावा आदेश में लिखी तारीख भी अलग हैं। आदेश में लिखी भाषा और हस्ताक्षर में भी अंतर है।
थाने में दर्ज हुई एफआईआर

इस आधार पर प्रताप सिंह और गब्बर सिंह समेत अन्य लोगों पर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर धोखाधडी करने की लिखित शिकायत कलेक्टर के रीडर लोकेश गोयल ने विश्वविद्यालय थाने में की। वहीं पुलिस ने उनकी शिकायत पर तीन नामजद और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
पुलिस ने शिकायत दर्ज की

मामले को लेकर एएसपी निरंजन शर्मा ने बताया कि जिरेना गांव में 20 बीघा सरकारी जमीन को हड़पने के लिए जालसाजों ने कलेक्टर का फर्जी आदेश ही बना दिया। लेकिन उनका फर्जीवाड़ा नाकाम रहा। आदेश में लिखी इबारत और हस्ताक्षर के अंतर से जालसाजों की करतूत पकड़ी गई। जिसकी शिकायत कर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। पुलिस ने तीन लोगों पर मामला दर्ज किया है।