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8 राज्यों में 42 ठिकानों पर छापेमारी, 5 गिरफ्तार, सीबीआई का साइबर क्राइम पर अटैक

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नईदिल्ली
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अंतरराष्ट्रीय संगठित साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट के मामलों पर शिकंजा कसते हुए 'ऑपरेशन चक्र-V' के तहत एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। सीबीआई ने इस ऑपरेशन के तहत 8 राज्यों में 42 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की और साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले अनाधिकृत सिम कार्ड की बिक्री में शामिल 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई साइबर अपराध और डिजिटल गिरफ्तारी के मामलों को रोकने के लिए चल रहे प्रयासों का हिस्सा है। सीबीआई ने विभिन्न टेलीकॉम ऑपरेटरों के पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) एजेंटों के परिसरों पर छापेमारी की। आरोप है कि ये एजेंट साइबर अपराधियों और टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं के अज्ञात अधिकारियों के साथ मिलकर सिम कार्ड जारी करने में शामिल थे, जिनका इस्तेमाल बाद में डिजिटल गिरफ्तारी, धोखाधड़ी, फर्जी विज्ञापन, निवेश धोखाधड़ी और यूपीआई धोखाधड़ी जैसी अवैध गतिविधियों में किया गया।
सीबीआई ने विशेष रूप से टेलीकॉम ऑपरेटरों के विभिन्न पीओएस एजेंटों द्वारा जारी किए गए अनाधिकृत सिम कार्ड की बिक्री और दुरुपयोग को रोकने के लिए समन्वित प्रयास किए। इसके तहत असम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु सहित 8 राज्यों में 38 पीओएस एजेंटों के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया।
इन छापों के दौरान, सीबीआई ने मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, केवाईसी दस्तावेजों की प्रतियां जैसे कई आपत्तिजनक दस्तावेज और लेख जब्त किए हैं। इसके अलावा, अनाधिकृत सिम कार्ड के वितरण में शामिल मध्यस्थों सहित व्यक्तियों की पहचान की गई है और अपराध की आय से अर्जित चल संपत्ति को भी जब्त किया गया है।
सीबीआई ने केवाईसी मानदंडों का उल्लंघन करते हुए साजिश के तहत अनाधिकृत रूप से सिम कार्ड बेचने में उनकी संलिप्तता के लिए 4 राज्यों से 5 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई साइबर अपराध और इसके अपराधियों से सख्ती से निपटने की भारत सरकार की चल रही प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसमें ऐसे अपराधों के पीछे के बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
फिलहाल, इस मामले में आगे की जांच जारी है और सीबीआई इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने के लिए प्रयासरत है। यह ऑपरेशन साइबर अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने और डिजिटल धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।