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ज्ञानवापी सर्वे को रोकने की मांग वाली याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा- हम दखल नहीं दे सकते

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नई दिल्ली, 29सितंबर। यूपी कोर्ट ने ज्ञानवापी सर्वे को रोकने की मांग वाली ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति की याचिका खारिज की. याचिका पर जिला जज एके विश्वेश ने कहा कि सर्वे को पहले ही इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिल चुकी है. इसलिए, इस मामले में इस अदालत से कोई आदेश पारित करना संभव नहीं है. बता दें, याचिका अंजुमन इंतजामिया मस्जिद की कमेटी की ओर से दाखिल की गई थी.

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि 17वीं सदी की मस्जिद का निर्माण हिंदू मंदिर के ऊपर किया गया था या नहीं. वकील राजेश मिश्रा ने कहा कि मस्जिद प्रबंधन समिति ने जिला अदालत के समक्ष दावा किया था कि एएसआई सर्वेक्षण निर्धारित नियमों के खिलाफ किया जा रहा था और इसे रोका जाना चाहिए.

मस्जिद समिति ने तर्क दिया कि वादियों को कोई नोटिस नहीं दिया गया और कोई फीस नहीं लिया गया. जिला जज ने कहा कि वादी पक्ष पर कोई नई शर्तें नहीं थोपी जा सकतीं.

जज ने गुरुवार को कहा,“भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण कोई निजी संगठन नहीं है. यह सरकारी काम करता है. किसी को सर्वेक्षण का खर्च देने के लिए बाध्य करना सही नहीं है.”

अदालत ने ज्ञानवापी परिसर में सील किए गए ‘वजुखाना’ का सर्वेक्षण करने के लिए हिंदू पक्ष की याचिका पर भी सुनवाई की. कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर की तारीख तय की है. सर्वेक्षण तब शुरू हुआ जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी जिला अदालत के आदेश को बरकरार रखा और फैसला सुनाया कि सर्वेक्षण “न्याय के हित में आवश्यक” है और इससे हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों को लाभ होगा. सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था.