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भारतीय अंतरिक्ष स्टार्ट-अप में निवेश 2023 में बढ़कर 124.7 मिलियन डॉलर हो गया है: डॉ. जितेंद्र सिंह

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नई दिल्ली, 21दिसंबर। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को कहा कि डीपीआईआईटी स्टार्ट-अप इंडिया पोर्टल के अनुसार स्पेस स्टार्ट-अप की संख्या 2014 में केवल 1 से बढ़कर 2023 में 189 हो गई है। उन्होंने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष स्टार्ट-अप में निवेश 2023 में बढ़कर 124.7 मिलियन डॉलर हो गया है।

केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह बात कही।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, भारतीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का वर्तमान आकार लगभग 8.4 बिलियन डॉलर (वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का लगभग 2-3%) अनुमानित है और उम्मीद है कि भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 के कार्यान्वयन के साथ, वर्ष 2033 तक 44 बिलियन डॉलर के आकर की भारतीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था हासिल की जा सकती है। अपेक्षित अर्थव्यवस्था के आंकड़े को हासिल करने में निजी क्षेत्र की भूमिका प्रमुख होगी। यह उम्मीद की जाती है कि निजी क्षेत्र उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण यान निर्माण, उपग्रह सेवाएँ प्रदान करने और ग्राउंड सिस्टम के निर्माण में स्वतंत्र रूप से अंतिम समाधान का कार्य करेगा।

एक अलग उत्तर में, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, वर्तमान में, उपग्रह स्थापना और संचालन के लिए सरकारी मार्ग के तहत अंतरिक्ष क्षेत्र में एफडीआई की अनुमति है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को बढ़ावा देने के लिए, अंतरिक्ष विभाग डीपीआईआईटी के परामर्श से अंतरिक्ष क्षेत्र के एफडीआई नीति दिशानिर्देशों की समीक्षा करने की प्रक्रिया में है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, कुछ गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीई) ने अपने स्वयं के उपग्रह लॉन्च किए। कई अन्य अंतरिक्ष उद्योग और स्टार्ट-अप भी अपने स्वयं के उपग्रह और तारामंडल का निर्माण कर रहे हैं। ये उपग्रह कृषि, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण निगरानी आदि में अनुप्रयोगों में योगदान देंगे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, जहां एक एनजीई ने अपना सब-ऑर्बिटल लॉन्च वाहन लॉन्च किया, वहीं एनजीई द्वारा पहली बार इसरो परिसर के भीतर एक निजी लॉन्चपैड और मिशन नियंत्रण केंद्र स्थापित किया गया है। उस एनजीई द्वारा उप-कक्षीय प्रक्षेपण शीघ्र ही निर्धारित है। सरकार ने भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 की घोषणा की है, जो अंतरिक्ष गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में एनजीई की शुरू से अंत तक भागीदारी को सक्षम बनाती है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निम्नलिखित अन्य विकास और प्रभाव गिनाए:

  1. निजी कंपनियाँ उपग्रह-आधारित संचार समाधान तलाश रही हैं। निजी हितधारक अंतरिक्ष-आधारित अनुप्रयोगों और सेवाओं में तेजी से भाग ले रहे हैं। निजी क्षेत्र में उपग्रह एकीकरण और परीक्षण सुविधाएं आ रही हैं।
  2. सैटेलाइट सबसिस्टम और ग्राउंड सिस्टम का स्थानीय विनिर्माण निजी क्षेत्र द्वारा किया जा रहा है।
    भारतीय निजी अंतरिक्ष कंपनियाँ तेजी से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष संगठनों और कंपनियों के साथ सहयोग और साझेदारी में प्रवेश कर रही हैं।
  3. डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, देश के पिछड़े क्षेत्रों में सहायता, पारिस्थितिकी तंत्र समर्थन और फंडिंग के माध्यम से अकादमिक समुदाय के साथ-साथ युवा स्टार्टअप तक पहुंचने के लिए किए जा रहे प्रयास इस प्रकार हैं:
  4. भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी शिक्षा को अपनाने के लिए इन-स्पेस द्वारा एक राष्ट्रीय समिति का गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य भारत में शैक्षणिक संस्थानों में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी शिक्षा के एकीकरण को सुविधाजनक बनाना और बढ़ावा देना, जागरूकता, कौशल विकास और अनुसंधान को बढ़ावा देना है।
  5. सेवानिवृत्त इसरो विषय विशेषज्ञों की सूची इन-स्पेस डिजिटल प्लेटफॉर्म (आईडीपी) पर प्रकाशित की गई है। एनजीई विशेषज्ञ सलाह आदि के लिए सीधे इन सलाहकारों से संपर्क कर सकते हैं।
  6. समय-समय पर अंतरिक्ष क्षेत्र में अनुभव रखने वाले टेक्नोक्रेट्स से सलाहकार के रूप में रूचि आमंत्रित करें और उन्हें एनजीई से जोड़ें।
    छात्रों/शैक्षणिक संस्थानों को अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करने के लिए एक समिति का गठन किया गया है जो उनके प्रस्ताव का मूल्यांकन करेगी और आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करेगी।
  7. अंतरिक्ष क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण जनशक्ति विकसित करने के लिए, इन-स्पेस समय-समय पर इसरो के सहयोग से सीड फंड योजना के साथ कौशल विकास अल्पकालिक पाठ्यक्रम आयोजित कर रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने और उसका समर्थन करने के लिए इन-स्पेस द्वारा विभिन्न योजनाओं की भी घोषणा की गई और उन्हें कार्यान्वित किया गया, जैसे कि सीड फंड योजना, मूल्य निर्धारण समर्थन नीति, मेंटरशिप समर्थन, एनजीई के लिए डिजाइन लैब, अंतरिक्ष क्षेत्र में कौशल विकास, इसरो सुविधा के उपयोग का समर्थन, और एनजीई को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण।

उन्होंने कहा कि इन-स्पेस ने एनजीई द्वारा परिकल्पित अंतरिक्ष प्रणालियों और अनुप्रयोगों की प्राप्ति के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए एनजीई के साथ लगभग 45 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे लॉन्च वाहनों और उपग्रहों के निर्माण में उद्योग की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, देश में अंतरिक्ष क्षेत्र से संबंधित कई उद्योग संघ हैं, भारतीय अंतरिक्ष संघ (आईएसपीए) उनमें से एक है। उन्होंने कहा कि ऐसे उद्योग संघों द्वारा की जा रही गतिविधियां सरकार के दायरे में नहीं आती हैं।