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भारतीय पुरावशेषों की तस्करी को रोकने के लिए अमेरिका के साथ सांस्कृतिक संपदा समझौते पर हस्ताक्षर किए, 297 प्राचीन वस्तुओं को वापस लाये

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नई दिल्ली

अब तक देश से तस्करी कर बाहर भेजी गई 588 भारतीय प्राचीन वस्तुएं अमेरिका से वापस लाई गई, इनमें से 297 को 2024 में वापस लाया गया। इसकी जानकारी केंद्र सरकार ने संसद को दी।केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत प्राचीन वस्तुओं के अवैध व्यापार को रोकने के लिए अमेरिका-भारत सांस्कृतिक संपत्ति समझौते के तहत वापस लौटाए गई ‘लूटे या चुराए गए कलाकृतियों’ की संख्या से संबंधित एक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे।

भारतीय प्राचीन वस्तुओं की तस्करी को रोकने के लिए अमेरिका के साथ सांस्कृतिक संपदा समझौते (सीपीए) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। मंत्री ने बताया कि यह समझौता रोकथाम के लिए है, इसलिए इसमें कोई निश्चित समय सीमा या लक्ष्य संख्या नहीं है।

केंद्रीय मंत्री से यह भी पूछा गया कि क्या सरकार चोरी हुई प्राचीन वस्तुओं को वापस लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठनों या अन्य देशों के साथ सहयोग करने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा, “भारत जरूरत पड़ने पर यूनेस्को और इंटरपोल सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग करता है।”

केंद्रीय मंत्री से ये प्रश्न भी पूछा गया कि क्या सरकार ने कुंभ मेले जैसे आयोजनों के दौरान ‘प्राचीन परंपराओं का पुनरुत्थान’ देखा?

उन्होंने जवाब दिया कि कुंभ मेला एक प्रमुख हिंदू धार्मिक उत्सव है और दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है, जहां लाखों श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान करने के लिए इकट्ठा होते हैं। इस दौरान, कई पुराने संप्रदाय, आध्यात्मिक संगठन और धार्मिक नेता एक साथ आते हैं और सदियों पुरानी रस्मों, परंपराओं और प्रथाओं का पालन करते हैं। उन्होंने कहा, “भारत में प्राचीन परंपराओं का पुनरुत्थान, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर में बढ़ती रुचि और आधुनिक धार्मिक चुनौतियों के बीच गहरे अर्थ की तलाश जैसे कारणों से हो रहा है।”

मंत्री ने कहा कि आज के समाज में यह पुनरुत्थान महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पारंपरिक प्रथाओं को बचाने, समाज में सौहार्द बढ़ाने और भारत की सांस्कृतिक धरोहर को मजबूत करने में मदद करता है।