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कोयला गैसीकरण परियोजनाएं स्थापित करने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड ने भेल, आईओसीएल और गेल (इंडिया) लिमिटेड के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए

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कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि आने वाले महीनों में भारत तापीय कोयला उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकता है

कोयला मंत्रालय का लक्ष्य 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण हासिल करना है

केंद्रीय कोयला, खान और संसदीय कार्य मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि अगले कुछ महीनों में भारत थर्मल (तापीय) कोयला उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकता है। 1 अक्टूबर 2022 को ताप संयंत्रों के पास 24 मिलियन टन का भंडार था और अगले साल मार्च तक तापीय ऊर्जा संयंत्रों के पास 40 मिलियन टन कोयले का स्टॉक उपलब्ध हो जाएगा। वह कोयला गैसीकरण परियोजनाओं के लिए पांच प्रमुख पीएसयू के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड, कोयला मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

भूतल कोयला गैसीकरण मार्ग के जरिए बड़े पैमाने पर कोयले से रसायन संबंधी चार परियोजनाओं की स्थापना के लिए, कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने देश की तीन प्रमुख पीएसयू- भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल), इंडियन ऑइल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) और गेल (इंडिया) लिमिटेड के साथ अलग-अलग समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इसके अलावा एनएलसी इंडिया लिमिटेड (एनएलसीआईएल) ने भेल के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

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35,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के साथ प्रस्तावित भूतल कोयला गैसीकरण (एससीजी) परियोजनाओं को पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में स्थापित करने की योजना है।

कोयला, खान और संसदीय कार्य मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी और भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम मंत्री श्री महेंद्र नाथ पांडे की मौजूदगी में एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस मौके पर डॉ. वीके सारस्वत, सदस्य (नीति आयोग), डॉ. अनिल कुमार जैन सचिव (कोयला), श्री अरुण गोयल, सचिव (भारी उद्योग), श्री पंकज जैन सचिव (एमओपीएनजी), श्री प्रमोद अग्रवाल, अध्यक्ष सीआईएल, श्री एम नागराजू, अतिरिक्त सचिव और नामित अथॉरिटी, पीएसयू के सीएमडी, कोयला, एमओपीएनजी और भारी उद्योग मंत्रालय के साथ ही पीएसयू के अधिकारी भी मौजूद रहे।

एससीजी मार्ग के जरिए कोयले को सिनगैस में बदला जाता है। इसे बाद में मूल्य वर्धित रसायनों के उत्पादन के लिए परिष्कृत किया जाता है, अन्यथा जो भारी खर्चे पर आयातित प्राकृतिक गैस या कच्चे तेल के जरिए मिलते हैं।

देश के चार प्रमुख पीएसयू एकसाथ आए हैं। इस कदम का उद्देश्य विदेशी मुद्रा व्यय को कम करना, आत्मनिर्भरता और स्वदेशी संसाधनों के पूंजीकरण को बढ़ावा देना है। इससे करीब 1200 लोगों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार और 20,000 से अधिक लोगों के लिए अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।

नवीकरणीय और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के साथ कोयले के इस्तेमाल के विकल्प बढ़ रहे हैं और भविष्य में विविधता से महत्व और बढ़ेगा। देश में 344 बिलियन टन (बीटी) कोयला संसाधनों के साथ 163 बीटी प्रमाणित भंडार है। व्यावसायिक रूप से देखें तो एससीजी के जरिए इन भंडारों का उपयोग करना एक बेहतर विकल्प है।

कोयला मंत्रालय मिशन मोड पर काम करते हुए कोयले के उपयोग पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और 2030 तक 100 मिलियन टन (एमटी) कोयला गैसीकरण हासिल करने का लक्ष्य रखा है। कोयला मंत्रालय ने पांच कोयला गैसीकरण संयंत्रों के कार्यान्वयन को प्रोत्साहित करके सीपीएसई को सपोर्ट करने के लिए 6,000 करोड़ रुपये आवंटित करने की पहल की है।

देश के सबसे बड़े ऊर्जा उत्पादक सीआईएल ने भूमिगत कोयला गैसीकरण को अपने व्यापार विविधता के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में चुना है, आईओसीएल और गेल बड़े पैमाने पर रासायनिक और प्रॉसेस प्लांटों के संबंध में अपने दशकों के अनुभव का इस्तेमाल कर सकते हैं।

भेल (बीएचईएल) ने अपने दबावयुक्त द्रवीकृत बेड दहन प्रौद्योगिकी के साथ पायलट अध्ययन किया है और उच्च-राख वाले भारतीय कोयले की आवश्यकता के अनुरूप ढाला है। सीआईएल और भेल की पहल से घरेलू कोयला गैसीकरण प्रौद्योगिकी का व्यावसायीकरण होगा।

सभी चार कॉरपोरेट दिग्गजों के बीच तालमेल और साझेदारी जटिल एससीजी परियोजनाओं को सही ढंग से लॉन्च करने में सक्षम बनाएगी।

सीआईएल की ओर से श्री देबाशीष नंदा, निदेशक (व्यवसाय विकास) ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।