Online News Portal for Daily Hindi News and Updates with weekly E-paper

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा-लाइव टेलिकास्ट नहीं, डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की संख्या 15 तक सीमित कर दी

38
Tour And Travels

कोलकाता
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुए ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप और मर्डर केस के बाद से ही प्रदर्शन चल रहा है। विरोध जता रहे अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों को पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज पंत ने नया लेटर भेजा है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से शाम पांच बजे बातचीत करने के लिए बुलाया है। इसके साथ ही, मुख्य सचिव ने नए लेटर में डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की संख्या 15 तक सीमित कर दी है। हालांकि, डॉक्टरों ने बैठक की जो लाइव टेलिकास्ट करने की मांग की थी, उसे ठुकरा दिया गया है। ट्रांसपेरेंसी के लिए रिकॉर्डिंग करने की अनुमति दी गई है। हालांकि, अब तक यह तय नहीं है कि क्या डॉक्टर बैठक में जाएंगे या नहीं।

डॉक्टर सॉल्ट लेक में पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय के बाहर धरना दे रहे हैं और रेप पीड़िता के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। रेप पीड़िता का शव 9 अगस्त को आरजी कर मेडिकल कॉलेज में मिला था। इसके बाद सिर्फ कोलकाता में ही नहीं, बल्कि पूरे देशभर में जमकर विरोध प्रदर्शन हुए थे। आज विरोध का 34वां दिन है। बुधवार को सरकार द्वारा बातचीत के लिए आमंत्रित किए जाने के बावजूद डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उपस्थिति और लाइव प्रसारण की शर्त रखी थी।

पीटीआई ने प्रदर्शनकारी डॉक्टरों में से एक के हवाले से कहा, "हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे और काम बंद करेंगे। लेकिन, हम इसे जारी नहीं रखना चाहते थे। राज्य सरकार हमारे साथ कोई बैठक करने के लिए तैयार नहीं है। और हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि हमारे आंदोलन के पीछे कोई राजनीति नहीं है।" जूनियर डॉक्टरों ने महिला स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा बढ़ाने और मामले के कथित कुप्रबंधन के लिए कोलकाता पुलिस आयुक्त सहित कई अधिकारियों को निलंबित करने की मांग की है। आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 31 वर्षीय ट्रेनी डॉक्टर से बलात्कार और हत्या की जांच कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की जा रही है।

इस बीच, राज्य सरकार ने आज अपने सचिवालय नबन्ना में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जिसमें सभी जिला मजिस्ट्रेट और अस्पतालों के अधीक्षक मौजूद थे। राज्य सरकार द्वारा पिछले दो दिनों में आंदोलनकारी डॉक्टरों से चर्चा करने के लिए दो बार प्रयास किया गया जो कि विफल रहा। वरिष्ठ डॉक्टरों ने अपने कनिष्ठों डॉक्टरों के साथ एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए कहा है कि अगर किसी को निलंबित किया गया तो वरिष्ठ डॉक्टर भी सरकारी अस्पतालों में बाह्य रोग विभाग में काम करना बंद कर देंगे। इससे पहले राज्य की स्वास्थ्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने बुधवार शाम को जूनियर डॉक्टरों के साथ सशर्त बातचीत को खारिज कर दिया था और उन्हें सोमवार के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की याद दिलाई थी, जिसमें डॉक्टरों को काम फिर से शुरू करने का निर्देश दिया गया था।