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सीबीएसई द्वारा अगले वर्ष से साल में दो बार परीक्षा आयोजित करने का लिया गया निर्णय, छात्रों और शिक्षकों के लिए बनी मुसीबत

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जालंधर
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा अगले वर्ष से साल में दो बार परीक्षा आयोजित करने का लिया गया निर्णय छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए हानिकारक है। यह विचार कोचिंग फेडरेशन पंजाब के अध्यक्ष प्रो.MP सिंह और अन्य सदस्यों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में व्यक्त किए।

फैडरेशन के सदस्यों ने कहा कि बोर्ड परीक्षा 2 बार आयोजित करने के सरकार के फैसले से छात्रों के बीच तनाव बढ़ेगा और कुछ महीनों के भीतर 2 परीक्षाओं के कारण छात्रों का संतुलन बिगड़ जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस नई परीक्षा प्रणाली से छात्रों और शिक्षकों के अलावा स्कूलों को भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस तरह शिक्षकों पर दोहरा बोझ पड़ेगा और छात्रों को भी दो बार ऐसी स्थिति से गुजरना पड़ेगा, जिसमें उन पर सबसे ज्यादा तनाव होगा।

डॉ. जसप्रीत सिंह ने कहा कि 2 बार परीक्षाओं के कारण उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया भी 2 बार होगी, जिससे छात्रों की शिक्षा प्रभावित होगी क्योंकि उत्तर पुस्तिकाओं की जांच भी शिक्षकों द्वारा की जाती है और इसमें समय भी लगता है।  फेडरेशन के सदस्यों ने कहा कि अक्सर स्कूल बोर्ड परीक्षा से पहले प्री-बोर्ड परीक्षा आयोजित करते हैं। ऐसे में स्कूली छात्र भी साल में दो बार प्री-बोर्ड परीक्षा लेंगे।  कोचिंग फेडरेशन की ओर से प्रधानमंत्री को भेजे गए मांग पत्र में मांग की गई है कि इस परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह लागू करने से पहले इसके सभी पहलुओं पर पुनर्विचार करने की जरूरत है।