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अक ,धतूरे के साथ अंदर की बुराइयां भी अर्पण करें -ब्रह्माकुमारी साधना दीदी

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इंदौर
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय सेंधवा2 द्वारा  महाशिवरात्रि पर्व बड़े हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया ।  मारवाड़ी सोशल ग्रुप की महिला मंडल अध्यक्ष बहन सन्ध्या तायल, इंजीनियर परेश पालिवालजी, एडवोकेट संजय मोरे,ब्रह्माकुमारीज की सेंधवा  प्रभारी बीके छाया दीदी तथा शहर के गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर उद्घाटन किया गया।शिव का सत्य परिचय लिये कुमारी एंजल ने स्वागत डांस किया।ब्रह्माकुमारी  साधना दीदी ने शिवरात्रि काआध्यात्मिक रहस्य बताते हुए कहा कि शिवरात्रि अर्थात परमात्मा कलयुग रूपी घोर अज्ञान अंधकार की रात में धरा पर आकर आत्म जागृति द्वारा अज्ञान अंधकार को नष्ट करते हैं।
परमात्मा शिव निराकर ज्योति बिंदु स्वरूप है जो ब्रह्मा, विष्णु, शंकर के भी रचयिता है इसीलिए उन्हें त्रिमूर्ति कहां जाता है, शिव परमात्मा ज्योति बिंदु स्वरूप है  इसलिए हम ज्योतिर्लिंग की पूजा करते हैं। वह जन्म मरण रहित, निराकार और अशरीरी, देवों के भी देव महादेव है। शिवरात्रि पर क्रोध रूपी धतूरा, दोहरा व्यक्तित्व रूपी आंकड़े का फूल एवं अभिमान व व्यसन रूपी गांजा भांग भगवान भोलेनाथ पर चढ़ाने से मनकामनेश्वर भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं ना कि स्थूल  चीजो से।हमे भगवान के ऊपर अक धतूरे के स्थान पर अपने अंदर की बुराइयों को अर्पण कर अपने जीवन को निर्मल बनाना ही शिवरात्रि की सार्थकता है!परेश पालीवाल जी  ने शिवरात्रि की शुभकामना देते हुए कहां कि वर्तमान परिवेश में व्यक्ति सुख ,शांति ढूंढने के लिए बाहर ज्यादा भाग रहा है लेकिन मैंने अपने जीवन के अनुभव से देखा कि सच्चा सुख धन दौलत व भौतिकता में नहीं है आंतरिक जगत में भीतर जाने से ही सच्चा सुख शांति  की अनुभूति होगी।  मेने कोई भी परिस्थिति हो मुझे खुश रहना है, यह पाठ ब्रह्माकुमारी बहनों से सीखा है।  ऐसे आयोजनों से नई जागृति आती है ऐसे कार्यक्रमों का हिस्सा समाज को जरूर बनना चाहिए।
 अन्य आए हुए सभी मंचासीन  अतिथियों द्वारा भी महाशिवरात्रि महापर्व की शुभकामनाएं दी गई एवं संस्था द्वारा बताये ईश्वरीय ज्ञान व राजयोग के कार्यक्रम की प्रशंसा की।छाया दीदी ने सभी कक खुशखबरी सुनाते हुए कहा कि अब कुछ ही वर्षो में इस पृथ्वी पर देवी दुनिया आएगी, जहाँ सुख शांति आनन्द प्रेम होगा। ऐसा संसार की स्थापना परमात्मा आकर करते हैं। छाया दीदी ने बताया कि शिव के साथ रात्रि शब्द लगाया जाता है, इसका अर्थ है चारो ओर दुख अशांति रूपी अंधियारा छाया हुआ है, ऐसे समय शिवजी इस धरा पर अवतरण लेते हैं। क्योंकि रात्रि के बाद दिन आता है रात्रि सदाकाल नही रहती ऐसी प्रकार दुख अशांति वाली दुनिया का भी अंत अवश्य होना है।ब्रह्माकुमारी रेखा बहन ने संस्था का परिचय देते हुए कहा कि यहाँ बिना किसी भेदभव के कोई भी आकर यहाँ की शिक्षा का निःशुल्क लाभ ले सकता है। कहा कि यह संस्था एक हॉस्पिटल भी है, जहाँ मन की बीमारियों का इलाज होता है।
हरीश भाई, संध्या बहन तायल, एडवोकेट संजय मोरे जी ने भी विचार रखें।अंत में शिव ध्वजारोहण कर छाया दीदी ने सभी को आंतरिक मतभेद बुराइयां और व्यसन को मिटाकर स्नेह, प्रेम से रहने की प्रतिज्ञा कराई। सभी अतिथियों को ईश्वरीय सौगात देकर सम्मानित किया गया।अंत में सभी को प्रसाद वितरण किया और सभी ने यहाँ के शिव दर्शन आधात्मिक दर्शनलय का अवलोकन किया।