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ट्रेनिंग कैम्प में प्रशिक्षण लेने वाले विधायकों, जिला अध्यक्षों सहित सभी नेताओं को निश्चित राशि बतौर पार्टी के पास जमा करनी होगी

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भोपाल

चुनावों में हार और दलबदल के बाद अब कांग्रेस अपने कैडर मैनेजमेंट पर फोकस कर रही है। अपने सभी विधायकों, जिला अध्यक्षों, जिला प्रभारियों, विधानसभा प्रभारियों को अब कांग्रेस आवासीय प्रशिक्षण देगी। ट्रेनिंग कैम्प में प्रशिक्षण लेने वाले विधायकों, जिला अध्यक्षों सहित सभी नेताओं को एक निश्चित राशि बतौर पार्टी के पास जमा करनी होगी। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी(AICC) ट्रेनिंग डिपार्टमेंट के चीफ सचिन राव और एमपी कांग्रेस के प्रशिक्षण विभाग द्वारा ये ट्रेनिंग कैम्प आयोजित किया जाएगा।

पार्टी के इतिहास से लेकर एआई को समझाएंगे बीते 7 मई को भोपाल में एमपी कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के साथ हुई बैठक में ये तय हुआ है कि पार्टी के कार्यकर्ताओं को आइडियोलॉजी के आधार पर जोड़ने के लिए विधायकों, जिलाध्यक्षों, प्रदेश पदाधिकारियों से लेकर ब्लॉक, मंडलम, सेक्टर और बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिए जाएं। सबसे पहले होने वाली ट्रेनिंग में कांग्रेस पार्टी के इतिहास, राजनीतिक सफरनामे से लेकर वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में बताया जाएगा।

फेक और फैक्ट को कैसे पहचानें कांग्रेस ने ट्रेनिंग मॉड्यूल तैयार किया है। इसमें प्रशिक्षणार्थियों को ये बताया जाएगा कि वर्तमान में एआई के युग में फेक न्यूज और कंटेंट और फैक्ट को कैसे पहचानें। विरोधी दल द्वारा सोशल मीडिया पर किए जाने वाले दुष्प्रचार को रोकने के तौर तरीके भी बताए जाएंगे।

मोबाइल मैनेजमेंट से लेकर चुनाव प्रबंधन सिखाएंगे कांग्रेस का मानना है कि सार्वजनिक जीवन में व्यक्ति के व्यवहार और काम करने के तौर तरीके का कार्यकर्ताओं और आम जनता पर बड़ा असर पड़ता है। ट्रेनिंग में मोबाइल मैनेजमेंट, मीडिया और सोशल मीडिया मैनेजमेंट भी सिखाया जाएगा।

प्रशिक्षण विभाग से जुडे़ एक सदस्य ने बताया कि कई नेता अपने वॉट्सऐप पर रीड रिसिप्ट ऑन किए रहते हैं। ऐसे में जब कोई वॉट्सऐप पर मैसेज भेजता है तो यह पता नहीं चलता कि मैसेज देखा या नहीं? नेताओं के वॉट्सऐप पर प्रोफाइल फोटो, बायो पब्लिक होना चाहिए।

एक्सपर्ट्स देंगे ट्रेनिंग कांग्रेस विधायकों, जिला अध्यक्षों, जिला प्रभारियों और विधानसभा प्रभारियों को ट्रेनिंग देने के लिए देश भर के अलग-अलग सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स बुलाए जाएंगे। दो दिनों में करीब सात-आठ सत्रों में अलग-अलग विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।