Online News Portal for Daily Hindi News and Updates with weekly E-paper

मोहन सिंह बिष्ट को मुसलमान बहुल मुस्तफाबाद सीट से चुनावी मैदान में उतारने का फैसला किया, उम्मीदों पर खड़े उतरे

51
Tour And Travels

नई दिल्ली
भाजपा ने अपने वरिष्ठ और अनुभवी नेता मोहन सिंह बिष्ट को इस चुनाव में मुसलमान बहुल मुस्तफाबाद सीट से चुनावी मैदान में उतारने का फैसला किया था। वह पार्टी की उम्मीदों पर खड़े उतरे। इस चुनाव में बंपर जीत दर्ज की है। आपको बता दें कि वह करावल नगर से विधायक थे, जहां से इस चुनाव में कपिल मिश्रा को मैदान में उतारा गया। वह भी चुनाव जीतने में सफल रहे हैं।

मुस्तफाबाद सीट की बात करें तो यहां 39.5% मुस्लिम मतदाता हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (AIMIM) ने इस सीट से आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद और 2020 दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन को अपना उम्मीदवार बनाया था। आम आदमी पार्टी ने अदील अहमद खान को उम्मीदवार बनाया था। मुस्तफाबाद उत्तर-पूर्व दिल्ली की सीट है, जहां 2020 में दंगे हुए थे। उस दंगे में 53 लोगों की मौत हुई थी।

मोहन सिंह बिष्ट को दिल्ली की राजनीति का एक अनुभवी नेता माना जाता है। उन्होंने 1998 में करावल नगर से विधायक के रूप में पहला चुनाव जीता और 2008 तक उस सीट पर बने रहे। हालांकि 2015 में बिष्ट को कपिल मिश्रा से हार का सामना करना पड़ा था, जब वे आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में थे। इसके बाद 2020 में बिष्ट ने करावल नगर से फिर से चुनाव जीता और कपिल मिश्रा को हराया।

भाजपा के आंतरिक सर्वे से यह संकेत मिला था कि करावल नगर के मतदाता कपिल मिश्रा की हिंदुत्व छवि को ज्यादा पसंद करते हैं, जिसके कारण बिष्ट को पार्टी द्वारा दूसरी सीट पर भेजा गया था। बिष्ट ने पार्टी के इस निर्णय को एक बड़ी गलती बताया था, लेकिन बाद में भाजपा ने उन्हें मुस्तफाबाद से चुनावी मैदान में उतारा था।

भाजपा के वरिष्ठ नेता बिष्ट तक जनता की आसान पहुंच होती है। उनकी स्थानीय मुद्दों को उठाने और विकास कार्यों को लागू करने में अहम भूमिका की सराहना करते हैं। हालांकि, 2020 में बिष्ट विवादों में आए थे जब एक महिला ने उन पर दंगों के दौरान एक भीड़ की अगुवाई करने और उसकी दुकान को आग लगाने का आरोप लगाया था।