Online News Portal for Daily Hindi News and Updates with weekly E-paper

US ने 18000 फीट की ऊंचाई और 460 किमी प्रति घंटे की स्पीड वाले ड्रोन को तबाह करने बनाया ‘ड्रोन किलर’

86
Tour And Travels

वॉशिंगटन
 युद्ध में आज के समय ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। ड्रोन में हथियार भर कर उन्हें दुश्मनों के ठिकानों पर सटीक तरीके से गिराया जा रहा है। ऐसे में इनसे निपटना एक नई चुनौती है। इटली की कंपनी लियोनार्डो की अमेरिकी सब्सिडरी कंपनी लियोनार्डो DRS ने ड्रोन खतरों का मुकाबला करने के लिए 8X8 स्ट्राइकर हल्के बख्तरबंद वाहन के नए संस्करण का अनावरण किया है। यह वाहन लेजर के साथ-साथ, 70 एमएम एडवांस्ड लेजर गाइडेड रॉकेट, 30 एमएम ऑटोमैटिक तोप और एडांस्ड सेंसर सिस्टम से लैस है। अमेरिकी सेना के लिए शॉर्ट रेंज डिफेंस सिस्टम के लिए यह महत्वपूर्ण है।

नए स्ट्राइकर प्रोटोटाइप पर ब्लूहेलो का 26 किलोवाट लेजर डायरेक्टेड हथियार लगा है। यह अलग-अलग आकार और प्रकार के ड्रोन को तबाह करने में सक्षम है। लियोनार्डो डीआरएस में बिजनेस डेवलपमेंट के वरिष्ठ निदेशक एड हाउस ने कहा, 'यह एक डायरेक्ट एनर्जी क्षमता प्रदान करेगा।' हथियार 600 किग्रा तक के वजन वाले, 18000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले और 460 किमी प्रति घंटे की स्पीड वाले ड्रोन को तबाह कर सकता है।

क्या है ताकत?

लेजर हथियार दुश्मन को मारने की क्षमता बढ़ा देता है। पारंपरिक हथियारों की तुलना में इसे बार-बार लोड किए बिना फायर किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त वाहन में 70 मिमी लेजर गाइडेड रॉकेट के चार गोले लॉन्च करने की सुविधा है। यह स्ट्राइकर वाहन की ड्रोन को तबाह करने की क्षमता को और बढ़ा देते हैं।

रॉकेट एडवांस्ड प्रिसिजन किल वेपन सिस्टम II (APKWS II) का हिस्सा हैं, जिन्हें खास तौर से ड्रोन को मारने के लिए बनाया गया है। नवंबर में भारत और अमेरिका ने साथ मिलकर एक ऐसा ही हथियार बनाने पर चर्चा की थी, जिसके जरिए सैनिकों को चीन की सीमा पर लाने ले जाने में मदद मिले। इसमें एंटी टैंक हथियार लगाया जाता।

मशीनगन भी लगी है

स्ट्राइकर पर 7.62 मिमी मशीन गन भी लगी है, ताकि हवाई और जमीनी दोनों खतरों को खत्म किया जा सके। एडवांस्ड हथियारों की मदद के लिए स्ट्राइकर नए अपडेट किए सेंसर से लैस है। इसमें ड्रोन का पता लगाने और ट्रैक करने वाले सेंसर हैं। साथ ही रडार लगा है। वाहन के सेंसर सूट में संभावित खतरों का पता लगाने और उन्हें वर्गीकृत करने के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे भी लगे हैं।