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भारत-अमेरिका संबंध समाज में विभिन्न आवाजों को महत्व देने के साथ ही शांतिपूर्ण समाधान को बढ़ावा देते हैं

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वॉशिंगटन
भारत और अमेरिका के मजबूत हो रहे संबंधों ने चीन और रूस की चिंता बढ़ा दी है। इसका कारण यह है कि भारत-अमेरिका संबंध समाज में विभिन्न आवाजों को महत्व देने के साथ ही समावेशिता, शांति और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को बढ़ावा देते हैं। अमेरिका के प्रबंधन एवं संसाधन के उपविदेश मंत्री रिचर्ड वर्मा ने कहा कि ठोस बुनियाद और उज्ज्वल भविष्य के साथ भारत-अमेरिका संबंध नए युग में प्रवेश कर गया है। रिचर्ड वर्मा भारत में अमेरिका के राजदूत रह चुके हैं।

मजबूत हुए भारत-अमेरिका के संबंध
रिचर्ड वर्मा ने हडसन इंस्टीट्यूट में भारत-अमेरिकी संबंधों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी अन्य देश की तरह अमेरिका और भारत भी हर बात पर सहमत नहीं हो सकते। लेकिन राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में यह और अधिक मजबूत हुआ है। 'क्वाड' पर एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य शांति, सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देना है।

वर्मा ने कहा कि इस रिश्ते में भी चुनौतियां हैं। मैं उन चुनौतियों के बारे में स्पष्ट रूप से जानता हूं जिनका हम सामना कर रहे हैं।
उदाहरण के लिए मैं रूस-चीन सहयोग को बढ़ाने के बारे में चिंतित हूं, खासकर सुरक्षा क्षेत्र में। यह साझेदारी रूस को यूक्रेन के खिलाफ अपने गैरकानूनी युद्ध में मदद कर सकती है।
उन्होंने कहा कि रूस की सहायता चीन को नई क्षमताएं भी दे सकती है जो इंडो-पैसिफिक की सुरक्षा के लिए चुनौती पेश करती हैं।
मैं स्पष्ट नियमों के साथ हमारे आर्थिक सहयोग को मजबूत, पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सचेत हूं।
उन्होंने कहा कि मैं हमारे सामूहिक नागरिक समाजों का समर्थन जारी रखने की आवश्यकता के प्रति सचेत हूं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हर आवाज सुनी जाए और उसे समर्थन दिया जाए, साथ ही बोलने की स्वतंत्रता भी हो।

क्वाड की मेजबानी कौन करेगा?
अमेरिकी राष्ट्रपति के एक प्रवक्ता ने गुरुवार को घोषणा की थी कि बाइडन अपने डेलवेयर स्थित आवास में अगले स्पताह क्वाड नेताओं के चौथे शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। इस साल क्वाड की मेजबानी भारत को करनी थी लेकिन अब वह अगले साल इस शिखर सम्मेलन का आयोजन करेगा।