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भारत ने 300 बांग्लादेशी घुसपैठिए भेजे वापस, युनूस सरकार बोली- ‘पहले बता तो देते’, संबंधों में आ सकती है खटास

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ढाका
भारत की ओर से अवैध रूप से घुसपैठ कर चुके करीब 300 बांग्लादेशी नागरिकों को सुंदरबन के रास्ते नाव में बैठाकर वापस बांग्लादेश भेज दिया गया है। यह कार्रवाई बीते कुछ दिनों में भारतीय खुफिया एजेंसियों के अलर्ट और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर बांग्लादेश सरकार द्वारा की गई। बांग्लादेश की युनूस  सरकार ने भारत सरकार से अपील की है कि भविष्य में अवैध घुसपैठियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत ही डिपोर्ट किया जाए। युनूस  सरकार ने भारत सरकार को पत्र लिखकर कहा है कि “कृपया डिपोर्ट करने से पहले दोनों देशों के बीच तय प्रक्रिया का पालन करें।”

ढाका में गृह सलाहकार क्वेलेट्टे जुरल जहरगीर आलम चौधरी की अध्यक्षता में हुई एक विशेष बैठक में यह तय हुआ कि बांग्लादेश की एजेंसियां उन नागरिकों को फिर से पहचानेंगी, जो अवैध रूप से भारत में घुस आए थे। इसके लिए 200 से ज्यादा घुसपैठियों की पहचान कर ली गई है। हरियाणा के  हिसार में मंगलवार को 39 बांग्लादेशी घुसपैठिए पकड़े गए हैं। ये सभी अलग-अलग गांवों और इलाकों में रह रहे थे। छानबीन के दौरान इनके पास वैध दस्तावेज नहीं मिले।भारत की सीमाओं पर सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और पहचान के डर से कई बांग्लादेशी नागरिक देर रात लुंगी पहनकर नाव के जरिये बांग्लादेश में वापस लौटने लगे। सुंदरबन के रास्ते तीन दिनों में 300 से अधिक लोगों को जबरन नाव में बैठाकर वापस भेजा गया।

परिवार के कुछ सदस्यों ने बताया कि उन्हें खुद पता नहीं चला कि उन्हें अचानक क्यों वापस भेजा जा रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि वे कई सालों से भारत में रह रहे थे। बांग्लादेश के सेनाध्यक्ष और युनूस  सरकार के बीच इस डिपोर्ट को लेकर असहमति सामने आई है। सेना ने 300 लोगों के जबरन डिपोर्ट पर नाराजगी जताई है और कहा है कि इससे दोनों देशों के संबंधों में खटास आ सकती है।विपक्षी  बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ( BNP)  ने आरोप लगाया कि यह सरकार का तानाशाही कदम है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने मांग की है कि भारत से आने वाले सभी डिपोर्ट को वैध प्रक्रिया से ही निपटाया जाए।