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मनेंद्रगढ़ में फिर संवर रहा कबाड़ी का कबाड़,पुलिस प्रशासन की भूमिका संदिग्ध

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एमसीबी/मनेंद्रगढ़
शहर में अवैध कबाड़ कारोबार फिर से फलने-फूलने लगा है। ऐसा प्रतीत होता है कि जिला प्रशासन, छत्तीसगढ़ सरकार के नारे कि, 'हमने बनाया है, हम ही संवारेंगे' की तर्ज पर इन अवैध कारोबारियों को संरक्षण दे रहा है।

सूरजपुर जिले के बहुचर्चित कबाड़ी हत्याकांड के बाद अब मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में एक और कबाड़ी को पुलिस प्रशासन द्वारा तैयार किया जा रहा है। यह गंभीर चिंता का विषय है कि चंद महीनों पहले पुलिस डिपार्टमेंट पर हुए हमले को प्रशासन भुला बैठा है। क्या प्रशासन किसी नए कांड का इंतजार कर रहा है?

जिला प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर उठते सवाल

मनेंद्रगढ़ के कई इलाकों सहित चंनवारीडांड में एक कबाड़ी ने महज कुछ वर्षों में करोड़ों की संपत्ति खड़ी कर ली है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह अवैध कारोबार पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से संचालित हो रहा है।

पुलिस प्रशासन पर यह भी आरोप लग रहे हैं कि वह चंद रुपयों के लालच में ऐसे अवैध कारोबारियों को पनाह दे रहा है। इससे न केवल शहर में अपराध को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि भविष्य में किसी बड़े अपराध की नींव भी तैयार हो रही है।

कबाड़ कारोबार का बढ़ता साम्राज्य

सूत्रों के अनुसार, मनेंद्रगढ़ में अवैध कबाड़ कारोबार तेजी से फैल रहा है और इस धंधे से जुड़े लोगों की आर्थिक स्थिति रातोंरात बदल रही है। इन कारोबारियों के पास बेनामी संपत्तियों का जखीरा है, जिसे प्रशासन अनदेखा कर रहा है।

जनता की मांग:–हो सख्त कार्रवाई

स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और पुलिस से इस अवैध कारोबार पर तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है। यदि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो यह कबाड़ी और भी मजबूत हो सकता है, जिससे अपराध की घटनाएं बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।

क्या प्रशासन जागेगा?

अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है। क्या अवैध कारोबारियों पर कोई कार्रवाई होगी, या फिर पुलिस-प्रशासन की अनदेखी के चलते मनेंद्रगढ़ का कबाड़ माफिया और ताकतवर होता जाएगा?