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विशेष राज्य के दर्जा के साथ बिहार ने 16वें वित्त आयोग से केंद्रीय करों में 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी मांगी

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पटना
विशेष राज्य के दर्जा के साथ बिहार ने 16वें वित्त आयोग से केंद्रीय करों में 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी मांगी है। इसके साथ ही करों के बंटवारे में बहुआयामी गरीबी सूचकांक को भी एक मानक बनाने का आग्रह किया है। गुरुवार को आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने बताया कि विशेष दर्जा वित्त आयोग के अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं। वैसे भी योजना आयोग के दौरान ही ऐसी व्यवस्था का समापन हो चुका है। उल्लेखनीय है कि 15वें वित्त आयोग ने कर हस्तांतरण की सीमा 41 प्रतिशत निर्धारित कर रखी है, जिसकी समय-सीमा वित्तीय वर्ष 2025-26 के साथ समाप्त हो जानी है। उसके बाद अगले पांच वित्तीय वर्ष के लिए 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाएं प्रभावी होंगी।

पनगढ़िया के नेतृत्व में 12 सदस्यीय टीम कर बंटवारे के संदर्भ में बिहार की अपेक्षाओं और सुझावों से अवगत होने के लिए तीन दिवसीय दौरे पर बुधवार रात पटना पहुंची थी। शुक्रवार को यह टीम मधुबनी में मिथिला हाट का अवलोकन करने के बाद वापस होगी। गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और वित्त विभाग का दायित्व संभाल रहे उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ इस टीम ने विचार-विमर्श किया। उसी दौरान पनगढ़िया को मांग-पत्र सौंपा गया। उसके बाद प्रेस-वार्ता में पनगढ़िया ने बताया कि बिहार सरकार के साथ भौगोलिक और आर्थिक परिस्थिति से चर्चा शुरू हुई, जिसमें राजस्व के पहलू पर फोकस रहा।

केंद्रीय करों में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी की मांग
बिहार की तरह 15 अन्य राज्यों ने भी केंद्रीय करों में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी की मांग की है। इसके साथ ही बिहार चाहता है कि सेस और सरचार्ज में भी बंटवारा हो।
हालांकि, इसके लिए संविधान में संशोधन की आवश्यकता होगी। दरअसल, आपात स्थिति और युद्ध-काल में व्यय के दृष्टिगत संविधान में यह प्रविधान है कि सेस और सरचार्ज पर पूर्णतया केंद्र का अधिकार होगा। बिहार ने संसाधन हस्तांतरण के मानकों में थोड़ा-बहुत परिवर्तन का भी सुझाव दिया है। पंचायती राज संस्थानों और शहरी निकायों के साथ तत्काल वित्तीय सहायता की मांग की है।

हमें यकीन कि वित्त आयोग करेगा राज्य सरकार की बातों पर विचार
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुरुवार को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद कक्ष में 16वें वित्त आयोग के साथ हुई बैठक में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि हमें यह यकीन है कि वित्त आयोग राज्य सरकार के ज्ञापन में उठाए गए विषयों पर गंभीरता से विचार करेगा। मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार द्वारा किए कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने 16 वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया सहित अन्य सदस्यों का अंगवस्त्र देकर स्वागत किया।

लगातार बढ़ रहा राज्य के बजट का आकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के बजट का आकार लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2005 में राज्य का बजट मात्र 30 हजार करोड़ रुपये था। इसके बाद राज्य सरकार ने काफी काम किया, जिससे बजट के आकार में बढ़ोतरी हुई। इस वर्ष राज्य का बजट तीन लाख, 17 हजार करोड़ रुपये का हो गया है।