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फरवरी से चल रही है नीलामी प्रक्रिया, छठी बार बदली नीलामी की रणनीति, 34 शराब दुकानों पर नहीं मिला खरीदार

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इंदौर
इंदौर शहर की 34 शराब दुकानें आबकारी विभाग के लिए गंभीर समस्या बन गई हैं। पांच बार नीलामी प्रक्रिया आयोजित करने के बावजूद 302 करोड़ रुपये मूल्य की इन दुकानों को खरीदने के लिए कोई भी व्यापारी आगे नहीं आया है। इस स्थिति को देखते हुए आबकारी विभाग ने अब छठी बार इन दुकानों की नीलामी करने का निर्णय लिया है। इस बार विभाग ने दुकानों को 13 की बजाय 18 समूहों में विभाजित कर दिया है, जिससे व्यापारियों को अधिक विकल्प मिल सके। इसके अलावा, नीलामी में कम कीमत पर बोली लगाने का विकल्प भी जोड़ा गया है, ताकि व्यापारियों को आकर्षित किया जा सके।

फरवरी से चल रही है नीलामी प्रक्रिया
हर वित्तीय वर्ष की तरह इस बार भी 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक के लिए शराब दुकानों की नीलामी की प्रक्रिया फरवरी में शुरू की गई थी। नई शराब नीति के अनुसार, दुकानों की कीमत में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई, जिससे कई व्यापारियों ने रुचि नहीं दिखाई। शुरुआती प्रक्रिया में 173 दुकानों में से 64 दुकानों को दोबारा संचालित करने के लिए मौजूदा व्यापारियों ने आवेदन नहीं किया। इस पर आबकारी विभाग ने लॉटरी के माध्यम से इन दुकानों की नीलामी करने की कोशिश की, लेकिन इनमें से भी 34 दुकानें नहीं बिक सकीं। इसके बाद विभाग ने मार्च में चार बार नीलामी प्रक्रिया शुरू की, लेकिन एक भी व्यापारी ने भाग नहीं लिया।
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छठी बार बदली नीलामी की रणनीति
लगातार असफल नीलामी के बाद आबकारी विभाग ने छठी बार नई प्रक्रिया की घोषणा की है। इस बार 34 दुकानों को छोटे समूहों में बांटते हुए 18 समूहों में विभाजित किया गया है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस बदलाव के बाद व्यापारी अधिक रुचि दिखा सकते हैं। नीलामी प्रक्रिया 22 मार्च तक जारी रहेगी, और उसी दिन आए हुए आवेदनों को खोलते हुए दुकानों की नीलामी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

बोली लगाने पर मिल सकती है छूट
आबकारी विभाग ने दुकानों को 18 समूहों में बांटने के साथ ही उनकी कीमतों में कमी करने का भी निर्णय लिया है। पहली बार विभाग ने तय कीमत से 5 प्रतिशत कम पर भी बोली लगाने की अनुमति दी है। यदि कोई व्यापारी कम राशि की बोली लगाता है, तो इसे शासन की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद दुकान को कम कीमत पर भी नीलाम किया जा सकेगा। इस नए फैसले से उम्मीद की जा रही है कि व्यापारी अधिक रुचि दिखाएंगे और विभाग की समस्या का समाधान हो सकेगा।