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YouTube के पीछे हाथ धोकर पड़ीं Meta, लगवानी चाहती हैं बैन

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लंदन
Meta और Snap समेत दूसरी कंपनियां हाथ धोकर YouTube के पीछे पड़ गई हैं. इन कंपनियों ने ऑस्ट्रेलिया सरकार से यूट्यूब पर भी बैन लगाने की मांग की है. दरअसल, ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए 16 साल के कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर बैन लगा दिया था, लेकिन यूट्यूब को इससे बाहर रखा गया था. अब बाकी कंपनियों का कहना है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए यूट्यूब पर भी बैन लगना चाहिए.

YouTube को क्यों बैन करवाना चाहती हैं बाकी कंपनियां?
टिकटॉक, फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा और स्नैप आदि का कहना है कि YouTube के कारण बच्चों को वही खतरे हैं, जो दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से थे. यूट्यूब भी बच्चों को एल्गोरिद्मिक कंटेट रिकमंडेशन, सोशल इंटरेक्शन फीचर और खतरनाक कंटेट तक एक्सेस देती है. मेटा का कहना है कि यूट्यूब की वजह से भी बच्चे हानिकारक कंटेट से एक्सपोज होते हैं. इसी तरह टिकटॉक का कहना है कि यूट्यूब को इस नियम से बाहर रखने से यह कानून विसंगत बन गया है. स्नैप ने भी इससे सहमति जताते हुए कहा है कि कानून को निष्पक्ष होना चाहिए और बिना किसी भेदभाव के इसके पालन किया जाना चाहिए.

YouTube पर क्यों नहीं लगाई थी पाबंदी?
ऑस्ट्रेलिया ने पिछले साल नवंबर में एक नया कानून पारित किया था. इसके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को एक्सेस नहीं कर सकते. अगर कोई प्लेटफॉर्म उन्हें लॉग-इन करने देगा तो उस पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है. हालांकि, यूट्यूब पर यह कानून लागू नहीं होता. इसके एजुकेशनल कंटेट और पेरेंटल सुपरविजन के साथ फैमिली अकाउंट के चलते इसे पाबंदी से बाहर रखा गया है. दूसरी कंपनियों के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए यूट्यूब ने कहा कि अपनी कंटेट मॉडरेशन पॉलिसी को मजबूत कर रही है और ऑटोमेटेड टूल्स के जरिए हार्मफुल कंटेट की पहचान कर रही है.