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शेयर बाजार में मचे हाहाकार के बीच तुहिन कांत पांडेय ने सेबी के 11वें चेयरमैन के रूप में कार्यभार संभाला

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नई दिल्ली
शेयर बाजार में मचे हाहाकार के बीच वरिष्ठ नौकरशाह तुहिन कांत पांडेय ने पूंजी बाजार नियामक सेबी के 11वें चेयरमैन के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। इस मौके पर उन्होंने पारदर्शिता और टीम-वर्क पर ध्यान केंद्रित करने का वादा किया। पांडेय ऐसे समय में सेबी के प्रमुख का पद संभालेंगे जब विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निकासी के बाद बाजार में मंदी का दबाव देखने को मिल रहा है। बता दें कि जनवरी से अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है। तुहिन कांत पांडे के लिए बाजार की ऐतिहासिक गिरावट एक बड़ी चुनौती होगी। इस बिगड़े माहौल में निवेशकों को सुरक्षा और भरोसा देने की जिम्मेदारी है।
 

क्या कहा सेबी के नए चेयरमैन ने

अब तक वित्त सचिव के रूप में कार्य कर रहे पांडेय ने सेबी को एक ऐसा मजबूत बाजार संस्थान बताया, जिसे वर्षों से विभिन्न दिग्गजों ने आकार दिया है। नए चेयरमैन ने अपने उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए चार टी- विश्वास (ट्रस्ट), पारदर्शिता (ट्रांसपेरैंसी), टीमवर्क और प्रौद्योगिकी (टेक्नोलॉजी) को अपने मुख्य ध्यान वाले क्षेत्रों के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि ये चार तत्व हमें (सेबी) विशिष्ट बनाते हैं, और हम दुनिया में सबसे अच्छे बाजार संस्थानों में से एक बनाना जारी रखेंगे। अपने कार्य-एजेंडे या कार्यशैली के बारे में बताने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि वह किसी पर टिप्पणी नहीं करेंगे।

बता दें कि अब तक सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच थीं। बुच पर उनके कार्यकाल के अंतिम कुछ महीनों में अनियमितताओं के कई आरोप लगे थे। पिछले कुछ महीनों में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) में कुछ गतिविधियां देखने को मिली हैं, जहां इसके कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग ने प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है।
 

ओडिशा कैडर के अधिकारी

तुहिन कांत पांडेय ओडिशा कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 1987 बैच के अधिकारी हैं और उनका कार्यकाल तीन साल का है। पांडेय वित्त मंत्रालय में राजस्व विभाग को संभालने वाले सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं। वह निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले सचिव थे। दीपम वित्त मंत्रालय का एक विभाग है, जो सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में सरकारी इक्विटी का प्रबंधन करता है।