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गुना में प्रशासन ने बीजेपी नेता अमन नाटले के होटल पर बुलडोजर चलाया

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 गुना

मध्य प्रदेश के गुना में प्रशासन ने बीजेपी नेता अमन नाटले के होटल पर बुलडोजर चला दिया है. अमन नाटले बीजेपी के नगर मंत्री हैं और उनका होटल इंडस्ट्रियल एरिया में संचालित हो रहा था. इसे अवैध अतिक्रमण मानते हुए प्रशासन ने कार्रवाई की. इस स्थान पर 35/11 केवी का सब स्टेशन बनाया जाना प्रस्तावित है. पुलिस की मौजूदगी में प्रशासनिक अमले ने होटल को धराशायी कर दिया. इस दौरान बीजेपी के कई नेता मौके पर मौजूद थे और कार्रवाई रोकने की कोशिश में जुटे थे, लेकिन अंततः अवैध निर्माण को हटा दिया गया.

मोहन सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का उदाहरण
यह कार्रवाई मुख्यमंत्री मोहन यादव की जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाती है. हाल ही में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) में उद्योगपतियों के लिए मध्य प्रदेश में व्यापार को आसान और व्यवस्थित बनाने का रोडमैप पेश किया गया था. गुना के इंडस्ट्रियल एरिया में बिजली की समस्या को दूर करने के लिए सब स्टेशन की स्थापना जरूरी थी, लेकिन बीजेपी नेता का होटल इसमें बाधा बना हुआ था. सरकार ने इस कार्रवाई से साफ संदेश दिया है कि विकास कार्यों में किसी भी तरह की रुकावट को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह पार्टी के अपने नेता ही क्यों न हों.

बीजेपी नेता ने जताई नाराजगी
बीजेपी नेता अमन नाटले ने कार्रवाई पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा, "यह होटल मेरे पिता ने स्थापित किया था. अचानक इसे अवैध बताकर बुलडोजर चला दिया गया. इस तरह की कार्रवाई क्यों हुई, इसका कोई जवाब नहीं दिया जा रहा." उनका कहना है कि प्रशासन ने उन्हें पहले से कोई सूचना नहीं दी.

तहसीलदार ने बताया कारण
कार्रवाई के लिए पहुँचे तहसीलदार गौरीशंकर बैरवा ने कहा, "इंडस्ट्रियल एरिया की जमीन पर होटल अवैध रूप से चल रहा था. इस स्थान पर बिजली विभाग का सब स्टेशन बनाया जाना है. इसलिए होटल को हटाने की कार्रवाई की गई." उन्होंने बताया कि यह कदम औद्योगिक विकास को गति देने के लिए उठाया गया है.

पार्टी नेताओं की सक्रियता बेकार
जब बुलडोजर होटल पर चल रहा था, बीजेपी के कई नेता मौके पर जुट गए और कार्रवाई रुकवाने की कोशिश में लगे थे. हालाँकि, प्रशासन ने किसी की नहीं सुनी और अवैध निर्माण को पूरी तरह ढहा दिया. यह घटना मोहन सरकार के उस संकल्प को दर्शाती है, जिसमें विकास को प्राथमिकता देते हुए अतिक्रमण पर सख्ती बरती जा रही है.

गुना में हुई इस कार्रवाई ने न केवल स्थानीय स्तर पर हलचल मचाई, बल्कि यह भी दिखाया कि सरकार अपने ही नेताओं के खिलाफ भी कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हट रही. इससे औद्योगिक क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बेहतर करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है.